RBSE Class 11th 2026 HALF-YEARLY-HINDI-1103 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 11th |
| Exam year | 2026 |
| Subject | HALF-YEARLY-HINDI-1103 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 11th 2026 HALF-YEARLY-HINDI-1103
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Rajasthan Board Class 11th HALF-YEARLY-HINDI-1103 2026 solved Previous Year Question Papers
खण्ड - अ
बहुविकल्पीय प्रश्न
निम्नलिखित अपठित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखिए:
चाह नहीं, मैं सुरबाला के
गहनों में गूँथा जाऊँ।
चाह नहीं, प्रेमी-माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊँ।॥
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर,
है हरि, डाला जाऊँ।
चाह नहीं, देवों के सिर पर
चढ़ूँ, भाग्य पर इठलाऊँ ॥
मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ पर देना तुम फेंक ||
मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने।
जिस पथ पर जाएँ वीर अनेक ||
-
उक्त पद्यांश का उचित शीर्षक है:
- (क) सुरबाला की चाह
- (ख) शहीद की अभिलाषा
- (ग) पुष्प की चाह
- (घ) पुष्प की अभिलाषा
सही उत्तर: (घ) पुष्प की अभिलाषा
व्याख्या: यह पद्यांश 'पुष्प की अभिलाषा' कविता से लिया गया है, जिसमें पुष्प अपनी इच्छा व्यक्त करता है कि वह देश के लिए बलिदान होने वाले वीरों के पथ पर फेंका जाए।
-
पद्यांश का सन्देश है:
- (क) फूलों की भाँति यशरूपी सुगंध फैलाना चाहिए।
- (ख) वीर सैनिक बनकर शत्रु से लोहा लेना चाहिए।
- (ग) अपना जीवन देश-सेवा में अर्पित करना चाहिए।
- (घ) भाग्य के भरोसे ही रहना चाहिए।
सही उत्तर: (ग) अपना जीवन देश-सेवा में अर्पित करना चाहिए।
व्याख्या: पद्यांश में पुष्प देश के लिए बलिदान होने की इच्छा व्यक्त करता है, जो देश-सेवा और बलिदान का संदेश देता है।
-
"मुझे तोड़ लेना वनमाली" यह कथन किसका है?
- (क) देशभक्त वीर का
- (ख) पुष्प का
- (ग) वनमाली का
- (घ) कवि का
सही उत्तर: (ख) पुष्प का
व्याख्या: यह कथन पुष्प का है, जो वनमाली (माली) से अपनी इच्छा व्यक्त करता है।
-
पद्यांश में पुष्प की कौनसी भावना प्रकट हुई है?
- (क) बलिदान की भावना
- (ख) विनय की भावना
- (ग) देशभक्ति की भावना
- (घ) प्रेम की भावना
सही उत्तर: (ग) देशभक्ति की भावना
व्याख्या: पुष्प देश के वीरों के पथ पर बलिदान होना चाहता है, जो देशभक्ति की भावना को दर्शाता है।
-
पुष्प किनमें गूँथा जाना नहीं चाहता?
- (क) सुरबाला के गहनों में
- (ख) प्रेमी-माला में
- (ग) सम्राटों के शव पर
- (घ) देवों के सिर पर
सही उत्तर: (क) सुरबाला के गहनों में
व्याख्या: पुष्प सुरबाला के गहनों, प्रेमी-माला, सम्राटों के शव और देवों के सिर पर नहीं जाना चाहता; वह केवल देश के लिए बलिदान होना चाहता है।
-
प्रेमी-माला में कौन नहीं बिंधना चाहता है?
- (क) पुष्प
- (ख) हरि
- (ग) वनमाली
- (घ) सैनिक
सही उत्तर: (क) पुष्प
व्याख्या: पुष्प प्रेमी-माला में बिंधकर प्यारी को ललचाना नहीं चाहता, बल्कि देश के लिए बलिदान होना चाहता है।
गद्यांश पर आधारित प्रश्न
गद्यांश: समय प्रकृति का दिया हुआ सबसे अधिक मूल्यवान उपहार है। समय का सदुपयोग करना चाहिए। बीता हुआ समय लौटाया नहीं जा सकता है। अनेक लोग कहते हैं कि काश मेरे पास कुछ समय और होता। बहुत से व्यक्ति समय निकलने पर पछताते हैं। यह सत्य है कि इन लोगों को कुछ समय और मिल जाता तो परिणाम कुछ और ही होता, लेकिन यह संभव नहीं है कि बीते हुए समय को फिर लौटाया जाए। यदि ये लोग अपने काम कुछ समय पहले ही शुरू कर देते तो फिर उन्हें पछताना नहीं पड़ता। प्रत्येक सफल कार्य का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि समय के सदुपयोग ने उस कार्य की सफलता में सर्वाधिक योग दिया है। समय पर कार्य करने वाला व्यक्ति कभी निराशा का मुँह नहीं देखता है। समय पर पढ़ने वाला विद्यार्थी असफल नहीं होता। समय पर किया गया हर कार्य सफलता में परिवर्तित हो जाता है जबकि समय बीतने पर विशेष प्रयास करने पर भी उसे सिद्ध नहीं किया जा सकता है। समय के मूल्य को विपत्तिकाल में ही पहचाना जाता है। यदि समय रहते कार्य किया जाए तो विपत्ति को दूर से ही टाला जा सकता है। इसलिए समय के मूल्य को समझकर कार्य करना चाहिए। अपने जीवन में समय को नष्ट नहीं करना चाहिए।
-
(क) इस अवतरण का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक है -
- समय ही धन है
- समय का सदुपयोग
- समय बड़ा बलवान
- समय का महत्व
सही उत्तर: (ख) समय का सदुपयोग
व्याख्या: गद्यांश में समय के सदुपयोग पर बल दिया गया है, इसलिए यह शीर्षक सबसे उपयुक्त है।
-
(ख) "समय पर कार्य करने वाला व्यक्ति" कैसा होता है?
- बीमार
- निराश
- उपयोगी
- पश्चातापी
सही उत्तर: (ग) उपयोगी
व्याख्या: गद्यांश के अनुसार समय पर कार्य करने वाला व्यक्ति कभी निराश नहीं होता और उसका कार्य सफल होता है, अतः वह उपयोगी होता है।
-
(ग) समय का मूल्य कब पहचाना जाता है?
- आलस्य काल में
- विपत्ति काल में
- सुख काल में
- इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (ख) विपत्ति काल में
व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है कि समय के मूल्य को विपत्तिकाल में ही पहचाना जाता है।
-
(घ) समय किसके द्वारा प्रदत्त मूल्यवान उपहार है?
- भगवान का
- वैज्ञानिक का
- मानव का
- प्रकृति का
सही उत्तर: (घ) प्रकृति का
व्याख्या: गद्यांश के प्रारंभ में ही कहा गया है कि समय प्रकृति का दिया हुआ सबसे मूल्यवान उपहार है।
-
(ङ) कौनसा विद्यार्थी असफल नहीं होता?
- आलसी विद्यार्थी
- पढ़ाई नहीं करने वाला विद्यार्थी
- समय पर पढ़ने वाला विद्यार्थी
- इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (ग) समय पर पढ़ने वाला विद्यार्थी
व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है कि समय पर पढ़ने वाला विद्यार्थी असफल नहीं होता।
-
(च) निम्न में से क्या कभी लौटाया नहीं जा सकता है?
- रुपया-पैसा
- सोना
- पुस्तकें
- बीता हुआ समय
सही उत्तर: (घ) बीता हुआ समय
व्याख्या: गद्यांश में कहा गया है कि बीता हुआ समय लौटाया नहीं जा सकता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न
-
(i) "गाने का ऐसा अंदाज जो एक आम आदमी को भी भावविभोर कर दे।" लता के गानों में शत-प्रतिशत उपस्थित किस विशेषता के बारे में यह कहा गया है?
- लय
- गानपन
- राग
- सुर
सही उत्तर: (ख) गानपन
व्याख्या: गानपन का अर्थ है गाने की वह विशेषता जो श्रोता को भावविभोर कर दे।
-
(ii) संगीत का मुख्य गुणधर्म है -
- गंभीरता
- जल्दबाजी और चपलता
- लय और ताल
- कोई भी नहीं
सही उत्तर: (ग) लय और ताल
व्याख्या: संगीत का मुख्य गुणधर्म लय और ताल ही होता है, जो इसे व्यवस्थित और सुंदर बनाता है।
-
(iii) "रजत बूंदे" रचना है -
- लम्बी-डंडी वाला फावड़ा
- खुदाई करने का एक प्रकार
- कई खोदने वाली बड़ी मशीन
- डंडी का छोटे फावड़े जैसा औजार
सही उत्तर: (घ) डंडी का छोटे फावड़े जैसा औजार
व्याख्या: 'रजत बूंदे' एक प्रकार का छोटा फावड़ा होता है जिसका उपयोग खुदाई में किया जाता है।
रिक्त स्थानों की पूर्ति
- (i) जिन शब्दों के स्वरूप में लिंग, वचन, काल, पुरुष एवं कारक आदि के प्रभाव से कोई विकार नहीं होता, उन्हें अव्यय कहते हैं।
- (ii) जिन अव्यय शब्दों के द्वारा हर्ष, शोक, घृणा, आश्चर्य इत्यादि भावों की अभिव्यक्ति होती है, उन्हें विस्मयादिबोधक कहते हैं।
- (iii) गेहूँ तद्भव शब्द का तत्सम रूप गोधूम है।
- (iv) चाय शब्द चीनी भाषा का है।
- (v) (रिक्त स्थान स्पष्ट नहीं है, अतः उत्तर नहीं दिया जा सकता।)
- (vi) (रिक्त स्थान स्पष्ट नहीं है, अतः उत्तर नहीं दिया जा सकता।)
- (vii) (रिक्त स्थान स्पष्ट नहीं है, अतः उत्तर नहीं दिया जा सकता।)
१३. निम्नलिखित अति लघुत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर एक पंक्ति में दीजिए -
- मुंशी वंशीधर द्वारा नमक ले जाने वाली गाड़ियाँ किसकी थी?
- नसीरुद्दीन ने रोटी पकाने का ढंग कहाँ सीखा था?
- 'पथेर पांचाली' फिल्म में अपू का किरदार किस लड़के ने निभाया?
- विदाई संभाषण किस अंग्रेज वायसराय के शासन में भारतीयों की स्थिति का खुलासा करता है?
- कबीरदास जी को 'वाणी का डिक्टेटर' किसने कहा?
- मीरा किस राजघराने की बहू थी?
- घर की याद कविता के रचयिता कौन हैं?
- साये में धूप गज़ल संग्रह के रचयिता कौन हैं?
- जनसंचार के कोई दो कार्य लिखिए।
- जनसंचार माध्यमों में प्रेस की क्या भूमिका होती है?
- चेलवांजी कौन होते हैं?
- आलो-आँधारि का क्या अर्थ है?
खण्ड - ब
निम्नलिखित लघुत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 40 शब्दों में दीजिए -
- धनराम को मोहन के किस व्यवहार पर आश्चर्य होता है और क्यों?
- लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास क्यों गई?
- कर्जन को इस्तीफा क्यों देना पड़ा?
- मायके आई बहन के लिए कवि ने घर को परिताप का घर क्यों कहा है?
- कवि ने चंपा को पढ़ने-लिखने के क्या-क्या लाभ गिनाए?
- “तेरा निज़ाम है सिल दे जुबान शायर की” पंक्ति का क्या आशय है?
- बेबी हालदार को रातभर खुले आसमान के नीचे क्यों रहना पड़ा?
- पानी निकालने में छोटी बाल्टी के बदले छोटी चड़स का उपयोग क्यों किया जाता है?
- लेखक ने लता के गायन की क्या विशेषताएं बताई हैं?
- भारत में टेलीविजन की शुरुआत कब हुई थी तथा जनसंचार दूरदर्शन के कोई तीन उद्देश्य लिखिए।
खण्ड - स
निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -
पद्यांश:
हम तौ एक एक करे जांनां।
अलग तिनहीं कौं दोजग जिन नाहिंन पहिचांनां।।
एके पवन एक ही पानी एक जोति समांनां।
एके खाक गढ़े सब एके कोहरा सांनां।।
जैसे बाढ़ी एक ही काटै अगिनि न काटै कोई।
सब घटि अंतरि व्यापक धरै सरूपै सोई।।
माया देखि के जगत लुभांनां काहे रे नर गरबांनां।
फिर भया कछू नहीं और कबीर दीवांनां।।
सन्दर्भ:
यह पद्यांश कबीरदास जी द्वारा रचित है, जिसमें उन्होंने ईश्वर की एकता और मानव समानता पर प्रकाश डाला है।
प्रसंग:
कबीरदास जी कहते हैं कि सभी मनुष्य एक ही परमात्मा की संतान हैं, इसलिए उनमें भेदभाव करना गलत है।
व्याख्या:
कबीर कहते हैं कि हम सब एक ही ईश्वर को जानते हैं। जो लोग इस एकता को नहीं पहचानते, वे नरक के भागी हैं। सबमें एक ही हवा, एक ही पानी और एक ही ज्योति (आत्मा) समाई है। सब एक ही मिट्टी से बने हैं और एक ही कोहरे (भ्रम) में फंसे हैं। जैसे बढ़ई एक ही लकड़ी को काटता है, वैसे ही ईश्वर सबमें व्याप्त है। माया के कारण संसार लुभाया हुआ है, तो मनुष्य क्यों अभिमान करता है? कबीर कहते हैं कि मैं तो ईश्वर में ही लीन हूँ।
अथवा
पद्यांश:
और कहना मस्त हूँ मैं,
कालने में व्यस्त हूँ मैं,
वजन सत्तर किलो मेरा,
और भोजन ढेर मेरा,
कूदता हूँ, खेलता हूँ,
डट कर ठेलता हूँ,
और कहना मस्त हूँ मैं,
यों न कहना अस्त हूँ मैं।
सन्दर्भ:
यह पद्यांश हरिवंशराय बच्चन की कविता 'अग्निपथ' से लिया गया है, जिसमें जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण दर्शाया गया है।
प्रसंग:
कवि अपने आपको मस्त और व्यस्त बताते हुए जीवन की सक्रियता का वर्णन कर रहे हैं।
व्याख्या:
कवि कहता है कि मैं मस्त हूँ, लेकिन काम में व्यस्त भी हूँ। मेरा वजन सत्तर किलो है और मैं खूब खाता हूँ। मैं कूदता, खेलता और जोर से धक्का देता हूँ। इसलिए मुझे मस्त कहो, लेकिन यह मत कहो कि मैं अस्त (थका या बेकार) हूँ। यह जीवन के प्रति उत्साह और ऊर्जा को दर्शाता है।