RBSE Class 11th 2026 HALF-YEARLY-HINDI-LITERATURE-1117-041225 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 11th |
| Exam year | 2026 |
| Subject | HALF-YEARLY-HINDI-LITERATURE-1117-041225 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 11th 2026 HALF-YEARLY-HINDI-LITERATURE-1117-041225
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Rajasthan Board Class 11th HALF-YEARLY-HINDI-LITERATURE-1117-041225 2026 solved Previous Year Question Papers
खण्ड - क
प्र.1. निम्न अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
प्राचीन भारतीय संस्कृति में धार्मिक कृत्यों में एकान्त साधना पर अधिक बल दिया गया है, यद्यपि सामूहिक प्रार्थना का अभाव नहीं है। हमारे कीर्तन आदि तथा महात्मा गाँधी द्वारा प्रार्थित प्रार्थना सभाएँ आदि में एकत्व की सामाजिक भावना को उत्पन्न करती आई हैं।
हमारे यहाँ सामाजिकता की अपेक्षा पारिवारिकता को महत्त्व दिया गया है। पारिवारिकता को खोकर सामाजिकता को ग्रहण करना तो मूर्खता होगी; किन्तु पारिवारिकता के साथ-साथ सामाजिकता बढ़ाना श्रेयस्कर होगा। भाषा और पोशाक में अपनत्व खोने जातीय व्यक्तित्व को तिलांजलि देना होगा। हमें अपनी सम्मिलित परिवार की प्रथा को इतना न बढ़ा देना चाहिए कि व्यक्ति व्यक्तित्वहीन हो जाए और न व्यक्ति को इतना महत्त्व देना चाहिए कि गुरुजनों को आदर भाव भी न रहे और पारिवारिक एकता पर कुठाराघात हो।
-
प्राचीन भारतीय संस्कृति में धार्मिक कृत्यों में किस पर अधिक बल दिया गया है?
प्राचीन भारतीय संस्कृति में धार्मिक कृत्यों में एकान्त साधना पर अधिक बल दिया गया है।
-
हमारे यहाँ सामाजिकता की अपेक्षा किसको महत्व दिया गया है?
हमारे यहाँ सामाजिकता की अपेक्षा पारिवारिकता को महत्व दिया गया है।
-
पारिवारिकता के साथ-साथ क्या बढ़ाना श्रेयस्कर है?
पारिवारिकता के साथ-साथ सामाजिकता बढ़ाना श्रेयस्कर है।
-
व्यक्ति का व्यक्तित्व कब समाप्त हो जाता है?
जब सम्मिलित परिवार की प्रथा को इतना बढ़ा दिया जाए कि व्यक्ति व्यक्तित्वहीन हो जाए, तब व्यक्ति का व्यक्तित्व समाप्त हो जाता है।
-
"भाषा और पोशाक में अपनत्व खोने" से क्या तात्पर्य है?
इसका तात्पर्य है कि यदि हम अपनी भाषा और पोशाक को छोड़कर दूसरों की नकल करेंगे तो हम अपनी पहचान और अपनत्व खो देंगे, जिससे हमारा जातीय व्यक्तित्व समाप्त हो जाएगा।
-
"एकान्त" शब्द का विपरीतार्थक शब्द लिखिए।
"एकान्त" का विपरीतार्थक शब्द "सामूहिक" या "सार्वजनिक" है।
-
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक "पारिवारिकता और सामाजिकता का संतुलन" या "भारतीय संस्कृति में पारिवारिकता का महत्व" हो सकता है।
खण्ड-क (अपठित बोध)
निम्न अपठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
पावस ऋतु थी, पर्वत प्रदेश,
पल-पल परिवर्तित प्रकृति-वेश।
मेखलाकार पर्वत अपार
अपने सहस्त्र दृग-सुमन फाड़,
वह रहा है बार-बार
नीचे जल में निज महाकार,
जिसके चरणों में पला ताल
दर्पणरसा फैला है विशाल!
झरने के गौरव गाकर झर-झर
मद में नस-नस उत्तेजित कर
मोती की लड़ियों-से सुंदर
गिर रहे हैं झाग भरे प्रपात!
- (क) प्रस्तुत काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत काव्यांश का उचित शीर्षक "पर्वत प्रदेश में पावस" या "पावस ऋतु का सौंदर्य" है।
- (ख) पर्वत का आकार कैसा है?
उत्तर: पर्वत का आकार मेखलाकार (कमरबंद के समान गोलाकार) है।
- (ग) पर्वत अपने सहस्त्र नेत्रों से क्या देख रहा है?
उत्तर: पर्वत अपने सहस्त्र नेत्रों से नीचे जल में अपना महाकार (विशाल रूप) देख रहा है।
- (घ) पर्वत के चरणों में क्या पला है?
उत्तर: पर्वत के चरणों में ताल (तालाब) पला है।
- (ङ) पर्वत प्रदेश में किस ऋतु का वर्णन है?
उत्तर: पर्वत प्रदेश में पावस ऋतु (वर्षा ऋतु) का वर्णन है।
- (च) "मोती की लड़ियों-से सुंदर" किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
उत्तर: "मोती की लड़ियों-से सुंदर" झाग भरे प्रपात (झरने) के लिए प्रयुक्त हुआ है।
- (छ) "दर्पणरसा फैला है विशाल" में कौनसा अलंकार है?
उत्तर: "दर्पणरसा फैला है विशाल" में उपमा अलंकार है (ताल को दर्पण के समान बताया गया है)।
- (ज) पर्वत का गौरव गान कौन कर रहा है?
उत्तर: झरने पर्वत का गौरव गान कर रहे हैं।
खण्ड-ख (रचनात्मक एवं व्यावहारिक लेखन)
प्रश्न 1: जनसंचार के कार्य बताइए।
जनसंचार के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
- सूचना प्रदान करना: जनता को देश-विदेश की घटनाओं, समाचारों और जानकारियों से अवगत कराना।
- शिक्षा एवं जागरूकता: लोगों को शिक्षित करना और सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाना।
- मनोरंजन: फिल्मों, नाटकों, संगीत आदि के माध्यम से मनोरंजन प्रदान करना।
- समाजीकरण: सामाजिक मूल्यों, परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित एवं प्रसारित करना।
- जनमत निर्माण: विभिन्न मुद्दों पर जनता की राय बनाने में सहायता करना।
- विज्ञापन एवं प्रचार: उत्पादों, सेवाओं और विचारों का प्रचार-प्रसार करना।
प्रश्न 2: ऑडियो-वीडियो संचार साधनों के नाम बताइए।
ऑडियो-वीडियो संचार साधनों के नाम निम्नलिखित हैं:
- दूरदर्शन (टेलीविजन)
- रेडियो
- सिनेमा (चलचित्र)
- इंटरनेट (यूट्यूब, वीडियो कॉलिंग)
- मोबाइल फोन (वीडियो कॉल, ऑडियो मैसेज)
- सीडी/डीवीडी प्लेयर
- पॉडकास्ट
प्रश्न 3: निम्न में से किसी एक विषय पर 300 शब्दों का निबंध लिखिए:
(क) साइबर अपराध के बढ़ते कदम
साइबर अपराध आज के डिजिटल युग की एक गंभीर समस्या बन गया है। इंटरनेट और तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ साइबर अपराधों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। साइबर अपराध में हैकिंग, फिशिंग, पहचान की चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर बुलिंग, डेटा चोरी, रैनसमवेयर हमले आदि शामिल हैं।
साइबर अपराध के बढ़ने के कई कारण हैं। पहला, लोगों में डिजिटल साक्षरता का अभाव है। दूसरा, साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी है। तीसरा, कमजोर पासवर्ड और असुरक्षित नेटवर्क का उपयोग करना। चौथा, सोशल मीडिया पर अत्यधिक निजी जानकारी साझा करना।
साइबर अपराध के दुष्परिणाम बहुत गंभीर हैं। इससे व्यक्तिगत और वित्तीय नुकसान होता है, मानसिक तनाव बढ़ता है, और सामाजिक विश्वास कम होता है। सरकार और प्रशासन ने साइबर अपराधों को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे साइबर सेल का गठन, आईटी अधिनियम में संशोधन, और जागरूकता अभियान चलाना।
हमें साइबर अपराध से बचने के लिए मजबूत पासवर्ड का उपयोग करना चाहिए, अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए, अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए, और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना चाहिए। साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।
(ख) महिला सशक्तिकरण
महिला सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, राजनीति और सामाजिक जीवन में समान अवसर और अधिकार प्रदान करना। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें महिलाएं अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम होती हैं और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त करती हैं।
महिला सशक्तिकरण के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण साधन है। शिक्षित महिलाएं न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के विकास में योगदान देती हैं। सरकार ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, महिला हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर जैसी योजनाएं शुरू की हैं।
आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं - चाहे वह शिक्षा हो, विज्ञान, खेल, राजनीति या व्यवसाय। लेकिन अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जैसे कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा और शिक्षा से वंचित रखना।
महिला सशक्तिकरण के लिए हमें सामाजिक दृष्टिकोण बदलना होगा, महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना होगा, और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना होगा। एक सशक्त महिला एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण करती है।
(ग) मेक इन इंडिया (स्वदेशी उद्योग)
मेक इन इंडिया कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 सितंबर 2014 को शुरू किया गया एक राष्ट्रीय अभियान है। इसका उद्देश्य भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना, रोजगार के अवसर पैदा करना और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
मेक इन इंडिया के अंतर्गत 25 क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है जिनमें ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा, बंदरगाह, रेलवे आदि शामिल हैं। इस योजना के तहत विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नियमों को सरल बनाया गया है।
स्वदेशी उद्योग को बढ़ावा देने से देश में रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, आयात पर निर्भरता कम होती है, और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। महात्मा गांधी ने भी स्वदेशी आंदोलन पर जोर दिया था।
मेक इन इंडिया के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। भारत अब मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और रक्षा उपकरणों का निर्माण कर रहा है। इससे देश का निर्यात बढ़ा है और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ है। हमें स्वदेशी उत्पादों को अपनाना चाहिए और मेक इन इंडिया अभियान को सफल बनाने में योगदान देना चाहिए।
प्रश्न 4: अपने जिला कलेक्टर को गांव में फैली मौसमी बीमारियों यथा मलेरिया, डेंगू आदि के नियंत्रण हेतु चिकित्सकों की टीम भेजने के लिए कार्यालयी पत्र लिखिए।
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खण्ड - व्यावहारिक व्याकरण
प्रश्न 9. हिंदी के मात्राएँ
(4) हिंसक जानवरों के दर्शन अपनी संख्या में... है।
हिंसक जानवरों के दर्शन, अपराध, विकृत, कहताती।
प्रश्न 10. सही विकल्प चयन कर तह हित पैष्टा द्वारा उत्पन्न मन की व्याकुलता, __.. है।
- रस से किसकी प्राप्ति होती है?
- आनंद की
- लय की
- सुर तुक की चमत्कार की
- हर उत्साह स्थायी भाव में मन की स्थिति रहती है - शा! Rs सुंदरता की
- aaa
- उल्लासपूर्ण
- आचार्य ने काव्य के भेद माने
- दो
- तीन
- चार
- “गण कितने प्रकार के होते हैं?
- छः
- आठ
- दस
- बारह
प्रश्न 11. प्रधान अलंकार के प्रमुख प्रकारों का सोदाहरण विवेचन कीजिए। (2)
उत्तर: प्रधान अलंकार के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:
- अनुप्रास अलंकार: जब किसी वर्ण की आवृत्ति बार-बार होती है। उदाहरण: "चारु चंद्र की चंचल किरणें" - यहाँ 'च' वर्ण की आवृत्ति है।
- यमक अलंकार: जब एक ही शब्द का अलग-अलग अर्थों में प्रयोग होता है। उदाहरण: "कनक कनक ते सौगुनी, मादकता अधिकाय" - पहले 'कनक' का अर्थ धतूरा और दूसरे का अर्थ सोना।
- श्लेष अलंकार: जब एक शब्द के एक से अधिक अर्थ निकलते हैं। उदाहरण: "रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून" - यहाँ 'पानी' का अर्थ जल और मर्यादा दोनों।
- उपमा अलंकार: जहाँ दो वस्तुओं में समानता दिखाई जाए। उदाहरण: "मुख चंद्रमा सा सुंदर है" - यहाँ मुख की तुलना चंद्रमा से की गई।
प्रश्न 12. श्लेष अलंकार की परिभाषा एवं उदाहरण लिखिए। (2)
उत्तर: श्लेष अलंकार की परिभाषा: जब किसी शब्द का प्रयोग एक बार किया जाए और उससे एक से अधिक अर्थ निकलते हों, तो वहाँ श्लेष अलंकार होता है।
उदाहरण: "रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून॥"
यहाँ 'पानी' शब्द के तीन अर्थ हैं - जल, मर्यादा, और चमक। इस प्रकार एक शब्द से अनेक अर्थों का बोध होना श्लेष अलंकार है।
अंतरा भाग
प्रश्न 13. निम्न पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए - (2)
अरे इन दोहुन राह न पाई।
हिंदू अपनी करे बडाई, गागर छुवन न देई।
मुसलमान के पीर-औलिया मुर्गी मुर्गा खाईं।
खाला घरहिं में करे सगाई।
अथवा
मुरली तऊ गुपालहिं मावति।
सुनि सी सखी जदपि नंदलालहिं; नाना भाँति नचावति।
राखति एक पाई करि, अति अधिफार जनावति।
कोमल जन आज्ञा करवावतति, टेढौ है आवति।
उत्तर (प्रथम पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या):
प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश कबीरदास जी द्वारा रचित है। इसमें कबीर ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर बल देते हुए धार्मिक आडंबरों की आलोचना की है।
व्याख्या: कबीर कहते हैं कि हिंदू और मुसलमान दोनों ही सच्चे मार्ग से भटक गए हैं। हिंदू अपनी जाति का बखान करता है और दूसरे को अपना बर्तन छूने नहीं देता। मुसलमान पीर-औलिया की पूजा करता है और मुर्गी-मुर्गा खाता है। दोनों ही अपने-अपने घरों में ही शादी-ब्याह करते हैं, जिससे समाज में संकीर्णता बढ़ती है। कबीर का कहना है कि ये सब बाहरी आडंबर हैं, सच्चा धर्म तो प्रेम और एकता में है।
प्रश्न 14. निम्न गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए - (2)
नमाज खत्म हो गई है। लोग आपस में गले मिल रहे हैं। तब मिठाई-और खिलौने की दुकानों पर घावा होता है। ग्रामीणों का यह दल इस विषय में बालकों से कम उत्साही नहीं है। यह देखो, हिंडोला है। एक पैसा देकर जाओ। कभी ऊपर जाते हुए मालूम होगे, कभी जमीन पर गिरते हुए। यह चर्खी है, लकड़ी के हाथी, घोड़े, लटके हुए हैं। एक पैसा देकर बैठ जाओ और पच्चीस मिनट का मजा लो।
अथवा
मैंने कहा - "तुम कुछ भी कहलाओ, वैचतें तुम टॉर्च हो। तुम्हारे और मेरे प्रवचन एक जैसे हैं। चाहे कोई दार्शनिक बने, रात बने या साधु बने, अगर वह लोगों को अंधकार का डर दिखाता है, तो ज़रूर अपनी कंपनी का टॉर्च बेचना चाहता है। तुम जैसे लोगों के लिए हमेशा ही अंधकार छाया रहता है। बताओ तुम्हारे जैसे किसी आदमी ने हज़ारों में कभी भी यह कहा है कि आज दुनिया में प्रकाश फैला है? कभी नहीं कहा। क्यों? इसलिए कि उन्हें अपनी कंपनी का टॉर्च बेचना है।"
उत्तर (प्रथम गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या):
प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश 'ईदगाह' कहानी से लिया गया है, जिसके लेखक प्रेमचंद हैं। यह ईद के मेले का वर्णन है।
व्याख्या: नमाज के बाद लोग एक-दूसरे से गले मिल रहे हैं। मिठाई और खिलौने की दुकानों पर भीड़ लग गई है। गाँव के बड़े-बूढ़े भी बच्चों की तरह उत्साहित हैं। लेखक मेले के आकर्षणों का वर्णन करता है - हिंडोला जिसमें एक पैसा देकर बैठने पर ऊपर-नीचे होने का मजा आता है, और चर्खी जिसमें लकड़ी के हाथी-घोड़े लटके हैं। एक पैसा देकर पच्चीस मिनट तक इसका आनंद लिया जा सकता है। यह दृश्य ईद के मेले की खुशी और उल्लास को दर्शाता है।
प्रश्न 15. राधा अरोड़ा अथवा हरिशंकर प्रसाई का साहित्यिक परिचय लिखिए। (2)
उत्तर (हरिशंकर प्रसाई का साहित्यिक परिचय):
हरिशंकर प्रसाई हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध व्यंग्यकार और निबंधकार हैं। इनका जन्म 1924 ई. में हुआ था। इनकी रचनाओं में समाज की विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य मिलता है। प्रमुख रचनाएँ: 'तिरछी रेखाएँ', 'विकलांग श्रद्धा का दौर', 'निबंध संग्रह' आदि। इन्होंने समाज में व्याप्त पाखंड, भ्रष्टाचार और रूढ़ियों पर करारा व्यंग्य किया। इनकी भाषा सरल, सहज और प्रभावशाली है।
प्रश्न 16. पाठ के लेखक का नाम लिखिए। (1)
उत्तर: पाठ के लेखक का नाम प्रेमचंद है।
प्रश्न 17. हामिद ने मेले में चिमटा कितने में खरीदा? (1)
उत्तर: हामिद ने मेले में चिमटा छ: आने में खरीदा।
प्रश्न 18. ने कहा - जहाँ अपकार है वहीं प्रकाश है। इसका क्या तात्पर्य है? (1)
उत्तर: इस कथन का तात्पर्य है कि जहाँ अंधकार (अपकार) होता है, वहीं प्रकाश (ज्ञान) की आवश्यकता होती है। अर्थात जहाँ समस्याएँ और कठिनाइयाँ हैं, वहीं समाधान और सुधार की संभावना भी है। यह जीवन के द्वंद्व को दर्शाता है कि बुराई के बिना अच्छाई का महत्व नहीं समझा जा सकता।