RBSE Class 12th 2026 CHEMISTRY-SS-41 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2026 |
| Subject | CHEMISTRY-SS-41 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2026 CHEMISTRY-SS-41
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Rajasthan Board Class 12th CHEMISTRY-SS-41 2026 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2026
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2026
रसायन विज्ञान
CHEMISTRY
समय : 3 घण्टे 5 मिनट
पूर्णांक : 56
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES:
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें |
Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न अनिवार्य हैं ।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें |
Write the answer to each question in the given answer-book only.
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खण्ड - अ
SECTION - A
बहुविकल्पात्मक प्रश्न :
Multiple Choice Questions :
निम्नांकित प्रश्नों में दिये गये सही विकल्प का चयन कर उत्तर को उत्तर पुस्तिका में लिखिए (i से xviii)।
Write the answer in answer book by selecting the correct option given in the following questions (i to xviii).
-
आदर्श विलयन का उदाहरण है
- अ) n-हेक्सेन व n-हेप्टेन का मिश्रण
- ब) ऐसीटोन व क्लोरोफॉर्म का मिश्रण
- स) ऐसीटोन व एथेनॉल का मिश्रण
- द) फ़ीनॉल व ऐनिलीन का मिश्रण
Example of an ideal solution is
- A) Mixture of n-hexane and n-heptane
- B) Mixture of acetone and chloroform
- C) Mixture of acetone and ethanol
- D) Mixture of phenol and aniline
सही उत्तर / Correct Answer: A (अ)
व्याख्या / Explanation: आदर्श विलयन वे होते हैं जिनमें अंतराआण्विक बल समान होते हैं और मिश्रण के दौरान न तो ऊष्मा परिवर्तन होता है और न ही आयतन परिवर्तन। n-हेक्सेन और n-हेप्टेन के मिश्रण में ये गुण पाए जाते हैं, जबकि अन्य विकल्पों में अंतराआण्विक अन्योन्य क्रियाएँ भिन्न होती हैं, जिससे विचलन होता है।
-
अधोलिखित में से अधिकतम वांट हॉफ गुणांक (i) मान वाला प्रबल वैद्युत अपघट्य है
- अ) NaCl
- ब) KCl
- स) MgSO₄
- द) K₂SO₄
The strong electrolyte having maximum value of Van’t Hoff factor (i) among the following is
- A) NaCl
- B) KCl
- C) MgSO₄
- D) K₂SO₄
सही उत्तर / Correct Answer: D (द)
व्याख्या / Explanation: वांट हॉफ गुणांक (i) विलयन में कणों की संख्या पर निर्भर करता है। प्रबल वैद्युत अपघट्य पूर्णतः वियोजित होते हैं। NaCl और KCl दो कण देते हैं (i ≈ 2), MgSO₄ भी दो कण देता है (i ≈ 2), जबकि K₂SO₄ तीन कण देता है (2K⁺ + SO₄²⁻, i ≈ 3)। अतः K₂SO₄ का i मान अधिकतम होता है।
SS-4-Chem.
प्रश्न (iii) – वैद्युतरोधी पदार्थ
अधोलिखित में से वैद्युतरोधी पदार्थ है:
- ग्रेफाइट (Graphite)
- टेफ्लॉन (Teflon)
- सोडियम (Sodium)
- सिल्क (Silk)
व्याख्या: टेफ्लॉन एक बहुलक है जो विद्युत का कुचालक (वैद्युतरोधी) होता है। ग्रेफाइट, सोडियम और सिल्क विद्युत के सुचालक हैं।
प्रश्न (iv) – HI के ऊष्मीय वियोजन की कोटि
स्वर्ण सतह पर HI के ऊष्मीय वियोजन हेतु अभिक्रिया की कोटि है:
- 0
- 1
- 2
- 3
व्याख्या: स्वर्ण सतह पर HI का ऊष्मीय वियोजन शून्य कोटि की अभिक्रिया है, क्योंकि यह सतह अभिक्रिया है और अभिकारक की सांद्रता से स्वतंत्र होती है। दिए गए विकल्पों में सही उत्तर 0 है, परंतु विकल्पों में 0 न होने पर सबसे निकटतम सही उत्तर 2 नहीं है। वास्तव में यह शून्य कोटि है।
प्रश्न (v) – वेग व्यंजक की कुल कोटि
वेग = K [A]² [B]¹ के लिए अभिक्रिया की कुल कोटि है:
- 1
- 2
- 3
- 5
व्याख्या: कुल कोटि = A की कोटि + B की कोटि = 2 + 1 = 3.
प्रश्न (vi) – संक्रमण तत्व
अधोलिखित में से संक्रमण तत्व है:
- जिंक (Zinc)
- कैडमियम (Cadmium)
- सीरियम (Cerium)
- रदरफोर्टियम (Rutherfordium)
व्याख्या: रदरफोर्टियम (Rf) एक संक्रमण तत्व है (समूह 4, d-ब्लॉक)। जिंक और कैडमियम d-ब्लॉक के अंतिम तत्व हैं लेकिन इनके d-कक्षक पूर्ण भरे होते हैं, अतः इन्हें संक्रमण तत्व नहीं माना जाता। सीरियम एक लैंथेनाइड है।
प्रश्न (vii) – अधिकतम अयुम्मित इलेक्ट्रॉन वाला आयन
अधिकतम अयुम्मित इलेक्ट्रॉन वाला आयन है:
- Ti³⁺
- V³⁺
- Fe³⁺
- Ni²⁺
व्याख्या: Fe³⁺ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d⁵ है, जिसमें 5 अयुम्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। Ti³⁺ में 1, V³⁺ में 2, और Ni²⁺ में 2 अयुम्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
viii) उभयदंती लिगैंड है
अ) H₂O ब) NH₃ स) NO₂⁻ द) Cl⁻
Ambidentate ligand is
- H₂O
- NH₃
- NO₂⁻
- Cl⁻
Explanation: An ambidentate ligand has two or more different donor atoms, but only one atom coordinates at a time. NO₂⁻ can coordinate through either nitrogen (nitro) or oxygen (nitrito), making it ambidentate.
ix) [Pt(NH₃)₂Cl(NO₂)] संकुल में Pt की समन्वय संख्या है
अ) 3 ब) 4 स) 5 द) 6
Coordination number of Pt in [Pt(NH₃)₂Cl(NO₂)] complex is
- 3
- 4
- 5
- 6
Explanation: In [Pt(NH₃)₂Cl(NO₂)], the ligands are: two NH₃ (neutral, each donating 1 electron pair), one Cl⁻ (donates 1 pair), and one NO₂⁻ (donates 1 pair). Total coordination number = 2 (NH₃) + 1 (Cl) + 1 (NO₂) = 4. However, Pt is in +2 oxidation state and typically forms square planar complexes with coordination number 4. The correct answer is 4.
x) अधोलिखित में से सर्वाधिक कार्बन-हैलोजन आबंध लंबाई वाला यौगिक है
अ) CH₃F ब) CH₃Cl स) CH₃Br द) CH₃I
Compound having largest carbon-halogen bond length among the following is
- CH₃F
- CH₃Cl
- CH₃Br
- CH₃I
Explanation: Bond length increases down the halogen group due to increasing atomic size. Iodine is the largest halogen, so C–I bond is the longest among C–F, C–Cl, C–Br, and C–I.
xi) 2CHCl₃ + O₂ → [A] + 2HCl
उपर्युक्त अभिक्रिया में उत्पाद [A] है
अ) फॉस्फीन ब) फॉस्जीन स) मेथिलीन क्लोराइड द) कार्बन टेट्राक्लोराइड
Product [A] in the above reaction is
- Phosphine
- Phosgene
- Methylene chloride
- Carbon tetrachloride
Explanation: Chloroform (CHCl₃) reacts with oxygen in the presence of light to form phosgene (COCl₂) and hydrogen chloride. The reaction is: 2CHCl₃ + O₂ → 2COCl₂ + 2HCl. Hence, [A] is phosgene.
xii) काष्ठ स्पिरिट है / Wood spirit is
- A) मेथेनॉल / Methanol
- C) ओपेनॉल / Propanol
Correct Answer: A) मेथेनॉल / Methanol
काष्ठ स्पिरिट (Wood spirit) मेथेनॉल का सामान्य नाम है, जो लकड़ी के शुष्क आसवन से प्राप्त होता है।
xiii) द्वितीयक ऐल्कोहॉल है / Secondary alcohol is
- A) एथिल ऐल्कोहॉल / Ethyl alcohol
- C) आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल / Isopropyl alcohol
Correct Answer: C) आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल / Isopropyl alcohol
आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल (CH₃CHOHCH₃) में -OH समूह द्वितीयक कार्बन से जुड़ा होता है, इसलिए यह द्वितीयक ऐल्कोहॉल है। एथिल ऐल्कोहॉल प्राथमिक ऐल्कोहॉल है।
xiv) अधोलिखित में से दुर्बलतम अम्ल है / Weakest acid among the following is
- A) HCOOH
- C) FCH₂COOH
- B) CH₃COOH
- D) ClCH₂COOH
Correct Answer: B) CH₃COOH (एसिटिक अम्ल)
CH₃COOH में मिथाइल समूह (+I प्रभाव) अम्लीयता को कम करता है, जबकि HCOOH, FCH₂COOH और ClCH₂COOH में इलेक्ट्रॉन-आकर्षी समूह अम्लीयता बढ़ाते हैं। अतः CH₃COOH सबसे दुर्बल अम्ल है।
xv) तृतीयक ऐमीन है / Tertiary amine is
- A) n-प्रोपिलऐमीन / n-propylamine
- C) एथिलमेथिलऐमीन / Ethylmethylamine
- B) आइसोप्रोपिलऐमीन / Isopropylamine
- D) ट्राईमेथिलऐमीन / Trimethylamine
Correct Answer: D) ट्राईमेथिलऐमीन / Trimethylamine
ट्राईमेथिलऐमीन (N(CH₃)₃) में नाइट्रोजन पर तीन कार्बन समूह जुड़े होते हैं, इसलिए यह तृतीयक ऐमीन है। अन्य विकल्प प्राथमिक या द्वितीयक ऐमीन हैं।
Multiple Choice Questions
-
xvi) ऐमीन में नाइट्रोजन परमाणु की संकरित अवस्था है
Hybridised state of nitrogen atom in amine is- A) sp
- B) sp²
- C) sp³
- D) spd
Explanation: In amines, the nitrogen atom is bonded to three substituents and has one lone pair of electrons, resulting in sp³ hybridization with a tetrahedral geometry.
-
xvii) पॉलिसैकैराइड है
Polysaccharide is- A) Ribose
- B) Lactose
- C) Sucrose
- D) Glycogen
Explanation: Glycogen is a polysaccharide made of many glucose units. Ribose is a monosaccharide, while lactose and sucrose are disaccharides.
-
xviii) अधोलिखित में से आवश्यक ऐमीनो अम्ल है
Essential amino acid among the following is- A) Glycine
- B) Valine
- C) Proline
- D) Tyrosine
Explanation: Essential amino acids cannot be synthesized by the human body and must be obtained from diet. Valine is an essential amino acid, while glycine, proline, and tyrosine are non-essential.
Fill in the Blanks
-
i) ताप बढ़ाने पर, द्रवों में गैसों की विलेयता __________ है।
On increasing temperature, solubility of gases in liquids __________.Answer: घटती है / decreases
Explanation: According to Henry's law, the solubility of gases in liquids decreases with an increase in temperature because the dissolution of gas is an exothermic process.
-
ii) मोलल उन्नयन स्थिरांक की इकाई __________ है।
The unit of molal elevation constant is __________.Answer: K kg mol⁻¹ (or °C kg mol⁻¹)
Explanation: The molal elevation constant (Kb) is defined as the elevation in boiling point when 1 mole of solute is dissolved in 1 kg of solvent. Its unit is K kg mol⁻¹ (or °C kg mol⁻¹).
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill in the blanks)
-
(iii) वैद्युत अपघटनी विलयनों की चालकता ताप बढ़ाने पर बढ़ती है।
व्याख्या: ताप बढ़ाने पर आयनों की गतिशीलता बढ़ जाती है, जिससे चालकता बढ़ती है।
Conductivity of electrolytic solutions increases with increase of temperature.
-
(iv) यदि किसी अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक का मान \( 1.75 \times 10^{-5} \, \text{L mol}^{-1} \text{s}^{-1} \) पाया गया, तो अभिक्रिया की कोटि द्वितीय है।
व्याख्या: वेग स्थिरांक की इकाई \( \text{L mol}^{-1} \text{s}^{-1} \) द्वितीय कोटि की अभिक्रिया के लिए होती है।
If the value of rate constant for any reaction is found to be \( 1.75 \times 10^{-5} \, \text{L mol}^{-1} \text{s}^{-1} \), then order of reaction will be second.
-
(v) प्रथम संक्रमण श्रेणी में सबसे कम कणन एन्थैल्पी मान वाला तत्व जिंक (Zn) है।
व्याख्या: जिंक का \( 3d^{10} \) विन्यास पूर्णतः भरा होता है, जिससे धात्विक बंध कमजोर होते हैं और कणन एन्थैल्पी न्यूनतम होती है।
The element having least enthalpy of atomisation value in the first transition series is zinc (Zn).
-
(vi) जिन त्रिविम समावयवियों का संबंध परस्पर अध्यारोपित न हो सकने वाले दर्पण प्रतिबिंबों की तरह होता है, उन्हें प्रकाशिक समावयवी (एनैन्टियोमर) कहते हैं।
व्याख्या: ऐसे समावयवी जो एक-दूसरे के अध्यारोपित न होने वाले दर्पण प्रतिबिंब होते हैं, एनैन्टियोमर कहलाते हैं।
The stereoisomers related to each other as non-superimposable mirror images are called optical isomers (enantiomers).
-
(vii) ऐलिल ब्रोमाइड का रासायनिक सूत्र \( \text{CH}_2=\text{CH}-\text{CH}_2\text{Br} \) है।
व्याख्या: ऐलिल ब्रोमाइड में ब्रोमीन परमाणु प्रोपीन के तीसरे कार्बन से जुड़ा होता है।
The chemical formula of allyl bromide is \( \text{CH}_2=\text{CH}-\text{CH}_2\text{Br} \).
-
(viii) जैविक प्रतिदर्शों के परिरक्षण में प्रयुक्त फॉर्मेल्डिहाइड का 40% जलीय विलयन फॉर्मेलिन कहलाता है।
व्याख्या: फॉर्मेल्डिहाइड का 40% जलीय विलयन फॉर्मेलिन कहलाता है, जिसका उपयोग जैविक नमूनों को संरक्षित करने में होता है।
40% aqueous solution of formaldehyde used to preserve biological specimens is known as formalin.
-
(ix) ट्राईमेथिलऐमीन की आकृति त्रिकोणीय पिरामिडीय होती है।
व्याख्या: ट्राईमेथिलऐमीन में नाइट्रोजन पर एक एकल युग्म होता है, जो त्रिकोणीय पिरामिडीय ज्यामिति देता है।
The shape of trimethylamine is trigonal pyramidal.
-
(x) विटामिन C की कमी से स्कर्वी रोग होता है।
व्याख्या: विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) की कमी से स्कर्वी रोग होता है, जिसमें मसूड़ों से खून आना और कमजोरी होती है।
Scurvy disease is caused by the deficiency of Vitamin C.
अति लघुत्तरात्मक प्रश्न / Very Short Answer Type Questions
3. निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या एक पंक्ति में दीजिए।
Answer the following questions in one word or one line (i to x).
-
(i) नाइट्रोजन गैस में क्लोरोफॉर्म के गैसीय विलयन में विलेय तथा विलायक लिखिए।
Write the solute and solvent in the gaseous solution of chloroform in nitrogen gas.उत्तर / Answer: विलेय (Solute) = क्लोरोफॉर्म (Chloroform), विलायक (Solvent) = नाइट्रोजन गैस (Nitrogen gas)
-
(ii) मर्क्यूरी सेल में प्रयुक्त एनोड का नाम लिखिए।
Write the name of anode used in the mercury cell.उत्तर / Answer: जिंक-मर्क्यूरी अमलगम (Zinc-mercury amalgam)
-
(iii) Ni(CO)4 में निकैल की ऑक्सीकरण अवस्था लिखिए।
Write the oxidation state of Nickel in Ni(CO)4.उत्तर / Answer: 0 (शून्य / Zero)
-
(iv) 'स्पिन मात्र' चुम्बकीय आघूर्ण ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
Write the formula for calculating 'spin only' magnetic moment.उत्तर / Answer: μs = √[n(n+2)] B.M., जहाँ n अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है।
(μs = √[n(n+2)] B.M., where n is the number of unpaired electrons.) -
(v) PET (निम्न चक्रण) संकुल का कोई एक उदाहरण लिखिए।
Write any one example of low spin complex.उत्तर / Answer: [Co(NH3)6]3+ या [Fe(CN)6]4− (कोई एक / Any one)
-
(vi) निम्नलिखित यौगिकों को SN2 अभिक्रिया के प्रति अभिक्रियाशीलता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
Arrange the following compounds in increasing order of reactivity towards SN2 reaction.CH3 – CH2 – CH = CH – CH2 – Br, CH3 – C(CH3)2 – CH2 – Br, CH3 – CH2 – CH(CH3) – CH2 – Br, CH3 – CH2 – CH2 – CH2 – Br
उत्तर / Answer: बढ़ता क्रम (Increasing order):
CH3 – C(CH3)2 – CH2 – Br < CH3 – CH2 – CH(CH3) – CH2 – Br < CH3 – CH2 – CH = CH – CH2 – Br < CH3 – CH2 – CH2 – CH2 – Brव्याख्या / Explanation: SN2 अभिक्रिया में अभिक्रियाशीलता का क्रम: प्राथमिक > द्वितीयक > तृतीयक है। यहाँ, CH3 – CH2 – CH2 – CH2 – Br (प्राथमिक) सबसे अधिक अभिक्रियाशील है, जबकि CH3 – C(CH3)2 – CH2 – Br (तृतीयक) सबसे कम अभिक्रियाशील है। एलिलिक ब्रोमाइड (CH3 – CH2 – CH = CH – CH2 – Br) भी प्राथमिक है लेकिन अनुनाद के कारण थोड़ा कम अभिक्रियाशील होता है।
vii) एथिल ऐल्कोहॉल के वाष्प को 573 K पर तप्त कॉपर के ऊपर से प्रवाहित किया जाता है, तो प्राप्त उत्पाद का नाम लिखिए।
Write the name of product obtained when vapour of ethyl alcohol are passed over heated Copper at 573 K.
उत्तर / Answer: एथेनल (एसीटैल्डिहाइड) / Ethanal (Acetaldehyde)
व्याख्या / Explanation: एथिल ऐल्कोहॉल (C₂H₅OH) के वाष्प को 573 K पर तप्त कॉपर (Cu) के ऊपर प्रवाहित करने पर निर्जलीकरण (dehydrogenation) होता है और एथेनल (CH₃CHO) प्राप्त होता है।
viii) डाइऐज़ोनियम लवण का सामान्य सूत्र लिखिए।
Write general formula of diazonium salt.
उत्तर / Answer: डाइऐज़ोनियम लवण का सामान्य सूत्र ArN₂⁺X⁻ है, जहाँ Ar = ऐरिल समूह (जैसे C₆H₅–) और X = Cl, Br, HSO₄, BF₄ आदि।
The general formula of diazonium salt is ArN₂⁺X⁻, where Ar = aryl group (e.g., C₆H₅–) and X = Cl, Br, HSO₄, BF₄, etc.
ix) मेथिलऐमीन से मेथिलआइसोसायनाइड में परिवर्तन का रासायनिक समीकरण लिखिए।
Write chemical equation for conversion from methylamine into methyl isocyanide.
उत्तर / Answer: यह कार्बिलऐमीन अभिक्रिया (Carbylamine reaction) है।
CH₃NH₂ + CHCl₃ + 3KOH → CH₃NC + 3KCl + 3H₂O
व्याख्या / Explanation: मेथिलऐमीन (CH₃NH₂) को क्लोरोफॉर्म (CHCl₃) और KOH के साथ गर्म करने पर मेथिलआइसोसायनाइड (CH₃NC) बनता है। यह प्राथमिक ऐमीनों की पहचान की अभिक्रिया है।
x) DNA तथा RNA का कोई एक अंतर लिखिए।
Write any one difference between DNA and RNA.
उत्तर / Answer:
| DNA | RNA |
|---|---|
| DNA में डीऑक्सीराइबोज़ शर्करा (Deoxyribose sugar) पाई जाती है। | RNA में राइबोज़ शर्करा (Ribose sugar) पाई जाती है। |
| DNA में थाइमिन (Thymine) क्षार पाया जाता है। | RNA में यूरेसिल (Uracil) क्षार पाया जाता है। |
खण्ड B / SECTION—B
लघुत्तरात्मक प्रश्न : (उत्तर सीमा लगभग 50 शब्द)
Short answer type questions : (Answer limit about 50 words)
4. स्थिरक्वाथी को परिभाषित कीजिए। न्यूनतम क्वथनांकी स्थिरक्वाथी को उदाहरण की सहायता से समझाइए।
Define azeotrope. Explain minimum boiling azeotrope with the help of example.
उत्तर / Answer:
स्थिरक्वाथी (Azeotrope): वह द्रव मिश्रण जो एक निश्चित संघटन पर बिना संघटन बदले एक स्थिर तापमान पर उबलता है, स्थिरक्वाथी कहलाता है।
न्यूनतम क्वथनांकी स्थिरक्वाथी (Minimum boiling azeotrope): यह वह मिश्रण है जिसका क्वथनांक इसके किसी भी घटक के क्वथनांक से कम होता है। यह तब बनता है जब घटकों के बीच अंतराअणुक बल शुद्ध घटकों की तुलना में कमजोर होते हैं (धनात्मक विचलन)।
उदाहरण (Example): एथिल ऐल्कोहॉल (क्वथनांक 78.4°C) और जल (क्वथनांक 100°C) का मिश्रण। 95.6% एथिल ऐल्कोहॉल और 4.4% जल का मिश्रण 78.15°C पर उबलता है, जो दोनों घटकों के क्वथनांक से कम है।
5. 6.0 g NaOH को जल में घोलकर 800 mL विलयन बनाया गया। विलयन की मोलरता की गणना कीजिए।
800 mL solution was prepared by dissolving 6.0 g of NaOH in water. Calculate the molarity of the solution.
हल / Solution:
NaOH का मोलर द्रव्यमान = 23 + 16 + 1 = 40 g/mol
NaOH के मोल = द्रव्यमान / मोलर द्रव्यमान = 6.0 g / 40 g/mol = 0.15 mol
विलयन का आयतन = 800 mL = 0.800 L
मोलरता (M) = मोलों की संख्या / आयतन (L) = 0.15 mol / 0.800 L = 0.1875 M
उत्तर / Answer: विलयन की मोलरता 0.1875 M है।
6. किसी अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक का मान 3.0 × 10⁻⁷ s⁻¹ है। अभिक्रिया के लिए अर्धायु की गणना कीजिए।
The value of rate constant for any reaction is 3.0 × 10⁻⁷ s⁻¹. Calculate the half-life for the reaction.
हल / Solution:
वेग स्थिरांक k = 3.0 × 10⁻⁷ s⁻¹
चूँकि k की इकाई s⁻¹ है, यह प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।
प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए अर्धायु (t₁/₂) = 0.693 / k
t₁/₂ = 0.693 / (3.0 × 10⁻⁷ s⁻¹)
t₁/₂ = 2.31 × 10⁶ s
उत्तर / Answer: अभिक्रिया की अर्धायु 2.31 × 10⁶ सेकंड है।
7. द्वितीय एवं तृतीय संक्रमण श्रेणी तत्वों की त्रिज्याएँ लगभग समान होती है | विश्लेषण कीजिए ।
The radii of second and third transition series elements are almost similar. Analyse.
विश्लेषण: द्वितीय एवं तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान होती हैं। इसका कारण लैन्थेनाइड संकुचन (Lanthanoid Contraction) है। तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों में, 4f कक्षकों में इलेक्ट्रॉन भरने के कारण नाभिकीय आवेश में वृद्धि होती है, जिससे आकार में अपेक्षित वृद्धि नहीं होती और त्रिज्याएँ द्वितीय श्रेणी के तत्वों के समान हो जाती हैं।
8. निम्नलिखित उपसहसंयोजक यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए |
Write the IUPAC name of the following coordination compounds:
- [Co(NH₃)₅Cl]Cl₂
- K₃[Al(C₂O₄)₃]
उत्तर:
- [Co(NH₃)₅Cl]Cl₂ का IUPAC नाम: पेंटाअम्मीनक्लोरिडोकोबाल्ट(III) क्लोराइड (Pentaamminechloridocobalt(III) chloride)
- K₃[Al(C₂O₄)₃] का IUPAC नाम: पोटैशियम ट्राइऑक्सैलेटोएलुमिनेट(III) (Potassium trioxalatoaluminate(III))
9. अष्टफलकीय क्रिस्टल क्षेत्र में d-ऑर्बिटलों के विपाटन का नामांकित चित्र बनाइए ।
Draw a labelled diagram of splitting of d-orbitals in octahedral crystal field.
चित्र: (यहाँ एक नामांकित चित्र का वर्णन किया गया है)
अष्टफलकीय क्षेत्र में, d-ऑर्बिटल दो समूहों में विभाजित हो जाते हैं:
- t₂g (निम्न ऊर्जा): dxy, dyz, dzx
- eg (उच्च ऊर्जा): dx²-y², dz²
दोनों समूहों के बीच ऊर्जा अंतर को Δo (क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा) कहते हैं।
10. ऐल्डिहाइड नाभिकरागी योगज अभिक्रियाओं के प्रति कीटोन से अधिक क्रियाशील क्यों होते हैं ?
Why are aldehydes more reactive towards nucleophilic addition reactions than ketones? Explain.
कारण: ऐल्डिहाइड कीटोन की तुलना में नाभिकरागी योगज अभिक्रियाओं के प्रति अधिक क्रियाशील होते हैं। इसके दो मुख्य कारण हैं:
- स्टेरिक (स्थानिक) कारण: ऐल्डिहाइड में कार्बोनिल कार्बन से केवल एक एल्किल समूह जुड़ा होता है, जबकि कीटोन में दो एल्किल समूह जुड़े होते हैं। दो बड़े समूह नाभिकरागी के आक्रमण में बाधा उत्पन्न करते हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक कारण: कीटोन में दो एल्किल समूह +I प्रभाव द्वारा कार्बोनिल कार्बन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ा देते हैं, जिससे यह नाभिकरागी के प्रति कम आकर्षित होता है। ऐल्डिहाइड में केवल एक एल्किल समूह होने से यह प्रभाव कम होता है।
11. निम्नलिखित यौगिकों के संरचनात्मक सूत्र लिखिए |
Write structural formula of the following compounds:
- सक्सीनिक अम्ल (Succinic acid)
- थैलिक अम्ल (Phthalic acid)
उत्तर:
- सक्सीनिक अम्ल (Succinic acid): HOOC-CH₂-CH₂-COOH (ब्यूटेन-1,4-डाइओइक अम्ल)
- थैलिक अम्ल (Phthalic acid): बेंजीन वलय पर 1,2-स्थिति में दो कार्बोक्सिल समूह (C₆H₄(COOH)₂)
12. ऐनिलीन की अनुनादी संरचनाएँ बनाइए |
Draw the resonating structure of aniline.
उत्तर: ऐनिलीन (C₆H₅NH₂) में नाइट्रोजन पर स्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के साथ अनुनाद में भाग लेता है। प्रमुख अनुनादी संरचनाएँ निम्नलिखित हैं:
- संरचना I: C₆H₅-NH₂ (मूल संरचना)
- संरचना II: नाइट्रोजन से इलेक्ट्रॉन युग्म वलय में स्थानांतरित होकर ऑर्थो स्थिति पर ऋणात्मक आवेश उत्पन्न करता है।
- संरचना III: पैरा स्थिति पर ऋणात्मक आवेश उत्पन्न होता है।
- संरचना IV: दूसरी ऑर्थो स्थिति पर ऋणात्मक आवेश उत्पन्न होता है।
इन अनुनादी संरचनाओं के कारण ऐनिलीन में NH₂ समूह ऑर्थो और पैरा दिशा निर्देशक होता है।
13. प्रोटीन के विकृतिकरण को समझाइए |
Explain denaturation of proteins.
विकृतिकरण (Denaturation): प्रोटीन की द्वितीयक, तृतीयक एवं चतुर्थक संरचना का नष्ट हो जाना, जिससे प्रोटीन अपनी जैविक क्रियाशीलता खो देता है, प्रोटीन का विकृतिकरण कहलाता है।
कारण: यह भौतिक कारकों (जैसे- ऊष्मा, विकिरण, प्रकाश) या रासायनिक कारकों (जैसे- अम्ल, क्षार, भारी धातु लवण, कार्बनिक विलायक) के प्रभाव से होता है।
प्रभाव: विकृतिकरण के दौरान प्रोटीन की जल में विलेयता कम हो जाती है और वह अवक्षेपित हो जाता है। उदाहरण: अंडे की सफेदी को गर्म करने पर वह जम जाती है (ठोस हो जाती है) - यह प्रोटीन का विकृतिकरण है।
खण्ड - स / SECTION - C
दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न (उत्तर सीमा लगभग 70-100 शब्द)
Long Answer Type Questions (Answer limit about 70-100 words)
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प्रश्न 4:
(अ) अभिक्रिया के औसत वेग एवं तात्क्षणिक वेग में विभेद कीजिए।
(ब) प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए समाकलित वेग समीकरण का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।अथवा / OR
(अ) Differentiate between average rate and instantaneous rate of reaction.
(ब) Derive the expression of integrated rate equation for first order reaction.उत्तर (अ): औसत वेग (Average Rate) किसी निश्चित समय अंतराल में अभिकारक या उत्पाद की सांद्रता में परिवर्तन की दर है, जबकि तात्क्षणिक वेग (Instantaneous Rate) किसी विशिष्ट क्षण पर अभिक्रिया की दर है। औसत वेग = -Δ[R]/Δt या +Δ[P]/Δt, जबकि तात्क्षणिक वेग = -d[R]/dt या +d[P]/dt।
उत्तर (ब): प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए समाकलित वेग समीकरण:
प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए वेग नियम: -d[R]/dt = k[R]
पुनर्व्यवस्थित करने पर: d[R]/[R] = -k dt
समाकलन करने पर: ∫ d[R]/[R] = -k ∫ dt
⇒ ln[R] = -kt + C (जहाँ C समाकलन स्थिरांक है)
t = 0 पर, [R] = [R]₀, अतः C = ln[R]₀
⇒ ln[R] = -kt + ln[R]₀
⇒ ln([R]₀/[R]) = kt
⇒ k = (2.303/t) log([R]₀/[R])
यह प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए समाकलित वेग समीकरण है।
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प्रश्न 5:
(अ) फिंकेलस्टाइन अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए।
(ब) हैलोऐल्केन की KCN तथा AgCN से अभिक्रिया से प्राप्त मुख्य उत्पादों की तुलना कीजिए।अथवा / OR
(अ) Write chemical equation of Finkelstein reaction.
(ब) Compare the major products obtained from the reaction of haloalkanes with KCN and AgCN.उत्तर (अ): फिंकेलस्टाइन अभिक्रिया में एल्किल हैलाइड को सोडियम आयोडाइड (NaI) के साथ एसीटोन में अभिकृत कराया जाता है, जिससे एल्किल आयोडाइड प्राप्त होता है।
R-Cl + NaI (एसीटोन में) → R-I + NaCl
R-Br + NaI (एसीटोन में) → R-I + NaBr
उत्तर (ब): हैलोऐल्केन की KCN तथा AgCN से अभिक्रिया में मुख्य उत्पादों की तुलना:
- KCN के साथ: KCN एक आयनिक यौगिक है, जो CN⁻ आयन प्रदान करता है। CN⁻ एक एम्बिडेंट नाभिकरागी है, लेकिन KCN में यह कार्बन परमाणु से जुड़ता है, जिससे एल्किल सायनाइड (R-CN) मुख्य उत्पाद बनता है।
- AgCN के साथ: AgCN में Ag⁺ आयन CN⁻ से जुड़ा होता है, जिससे C-Ag आबंध बनता है। यह नाभिकरागी नाइट्रोजन परमाणु से जुड़ता है, जिससे एल्किल आइसोसायनाइड (R-NC) मुख्य उत्पाद बनता है।
इस प्रकार, KCN से एल्किल सायनाइड (R-CN) और AgCN से एल्किल आइसोसायनाइड (R-NC) प्राप्त होता है।
प्रश्न 5.
(a) वुर्ट्ज अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर: वुर्ट्ज अभिक्रिया में दो ऐल्किल हैलाइडों को सोडियम धातु की उपस्थिति में शुष्क ईथर में अभिकृत कराया जाता है, जिससे एक उच्च ऐल्केन प्राप्त होता है।
रासायनिक समीकरण:
2R–X + 2Na → R–R + 2NaX
उदाहरण: 2CH₃–Cl + 2Na → CH₃–CH₃ + 2NaCl
(b) ऐल्किल हैलाइडों की तुलना में ऐरिल हैलाइड नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति कम क्रियाशील होते हैं। विश्लेषण कीजिए।
उत्तर: ऐरिल हैलाइड (जैसे C₆H₅Cl) ऐल्किल हैलाइडों (जैसे CH₃Cl) की तुलना में नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति कम क्रियाशील होने के निम्नलिखित कारण हैं:
- अनुनाद स्थिरीकरण: ऐरिल हैलाइड में हैलोजन परमाणु के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के π-इलेक्ट्रॉनों के साथ अनुनाद में भाग लेते हैं, जिससे C–X आबंध में आंशिक द्वि-आबंध गुण आ जाता है। यह आबंध को अधिक मजबूत बनाता है और इसे तोड़ना कठिन हो जाता है।
- sp² संकरण: ऐरिल हैलाइड में कार्बन sp² संकरित होता है, जो sp³ संकरित कार्बन (ऐल्किल हैलाइड) की तुलना में अधिक विद्युतऋणात्मक होता है। इससे C–X आबंध अधिक मजबूत होता है।
- नाभिकरागी के आक्रमण में बाधा: बेंजीन वलय पर उपस्थित π-इलेक्ट्रॉन घनत्व नाभिकरागी को प्रतिकर्षित करता है, जिससे आक्रमण कठिन हो जाता है।
- SN2 क्रियाविधि की असंभावना: ऐरिल हैलाइड में sp² कार्बन पर SN2 क्रियाविधि संभव नहीं है क्योंकि पश्च दिशा से आक्रमण के लिए आवश्यक संक्रमण अवस्था (जिसमें कार्बन पाँच-संयोजी हो) बेंजीन वलय की समतलीय संरचना के कारण नहीं बन सकती।
- SN1 क्रियाविधि की असंभावना: ऐरिल हैलाइड में C–X आबंध के विदलन से फेनिल धनायन (C₆H₅⁺) बनता है, जो अत्यधिक अस्थायी होता है और आसानी से नहीं बनता।
इन्हीं कारणों से ऐरिल हैलाइड नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति कम क्रियाशील होते हैं।
प्रश्न 6.
(a) वेनिला सेम से प्राप्त ऐल्डिहाइड का नाम लिखिए।
उत्तर: वेनिला सेम से प्राप्त ऐल्डिहाइड का नाम वैनिलिन (Vanillin) है। इसका रासायनिक नाम 4-हाइड्रॉक्सी-3-मेथॉक्सीबेन्ज़ैल्डिहाइड है।
(b) निम्नलिखित रासायनिक समीकरणों को पूर्ण कीजिए एवं मुख्य उत्पाद लिखिए।
(i)
अभिक्रिया:
C₆H₅–CO–Cl + H₂ → ? (Pd–BaSO₄ की उपस्थिति में)
पूर्ण समीकरण:
C₆H₅–CO–Cl + H₂ → C₆H₅–CHO + HCl
मुख्य उत्पाद: बेन्ज़ैल्डिहाइड (Benzaldehyde)
(यह रोज़ेनमुंड अपचयन अभिक्रिया है, जिसमें Pd–BaSO₄ उत्प्रेरक का उपयोग होता है।)
(ii)
अभिक्रिया:
CH₃COONa + NaOH → ? (CaO की उपस्थिति में, ताप)
पूर्ण समीकरण:
CH₃COONa + NaOH → CH₄ + Na₂CO₃
मुख्य उत्पाद: मीथेन (Methane, CH₄)
(यह डीकार्बोक्सिलीकरण अभिक्रिया है, जिसमें सोडियम लवण को सोडियम हाइड्रॉक्साइड और कैल्शियम ऑक्साइड के साथ गर्म किया जाता है।)
प्रश्न 6 (अ)
भेडोस्वीट (Meadowsweet) से प्राप्त ऐल्डिहाइड का नाम सैलिसिलैल्डिहाइड (Salicylaldehyde) है।
प्रश्न 6 (ब)
निम्नलिखित रासायनिक समीकरणों को पूर्ण कीजिए एवं मुख्य उत्पाद लिखिए:
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i) +CH₃-C-Cl —-
पूर्ण समीकरण:
बेंजीन + CH₃COCl → (निर्जल AlCl₃) → एसीटोफेनोन + HCl
मुख्य उत्पाद: एसीटोफेनोन (Acetophenone)
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ii) LiAlH₄/ईथर —-
पूर्ण समीकरण:
R-COOH + LiAlH₄/ईथर → R-CH₂OH + H₂O
मुख्य उत्पाद: प्राथमिक ऐल्कोहॉल (Primary Alcohol)
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iii) CH₃COOH —-
पूर्ण समीकरण:
CH₃COOH + NaOH → CH₃COONa + H₂O
मुख्य उत्पाद: सोडियम एसीटेट (Sodium Acetate)
SECTION - 9
निबंधात्मक प्रश्न (उत्तर सीमा लगभग 250 शब्द)
प्रश्न 7 (अ)
इलेक्ट्रोड विभव (Electrode Potential) की परिभाषा:
इलेक्ट्रोड विभव वह विद्युत विभवांतर है जो एक धातु के इलेक्ट्रोड और उसके आयनों वाले विलयन के बीच साम्यावस्था पर उत्पन्न होता है। यह धातु की अपने आयनों में ऑक्सीकृत होने या आयनों से अपचयित होने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) 25°C तापमान और 1 M सांद्रता पर मापा जाता है।
प्रश्न 7 (ब)
ईंधन सेल का नामांकित चित्र:
ईंधन सेल एक विद्युत रासायनिक सेल है जो ईंधन (जैसे हाइड्रोजन) और ऑक्सीकारक (जैसे ऑक्सीजन) की रासायनिक ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
नामांकित भाग:
- एनोड (Anode): हाइड्रोजन गैस प्रवेश करती है, यहाँ ऑक्सीकरण होता है: H₂ → 2H⁺ + 2e⁻
- कैथोड (Cathode): ऑक्सीजन गैस प्रवेश करती है, यहाँ अपचयन होता है: O₂ + 4H⁺ + 4e⁻ → 2H₂O
- इलेक्ट्रोलाइट (Electrolyte): KOH विलयन (क्षारीय माध्यम)
- बाह्य परिपथ (External Circuit): इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह
- उत्पाद: जल (H₂O) और विद्युत ऊर्जा
प्रश्न 7 (स)
गणना:
दिया गया है:
- धारा (I) = 1 एम्पियर
- समय (t) = 15 मिनट = 15 × 60 = 900 सेकंड
- 1 F = 96500 C mol⁻¹
हल:
कैथोड पर अभिक्रिया: Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu
कॉपर का तुल्यांकी भार = 63.5/2 = 31.75 g/eq
प्रवाहित आवेश (Q) = I × t = 1 × 900 = 900 कूलॉम
निक्षेपित कॉपर का द्रव्यमान = (तुल्यांकी भार × Q) / 96500
= (31.75 × 900) / 96500
= 28575 / 96500
= 0.296 ग्राम
उत्तर: कैथोड पर निक्षेपित कॉपर का द्रव्यमान 0.296 ग्राम है।