RBSE Class 9th 2026 HINDI-901 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 9th |
| Exam year | 2026 |
| Subject | HINDI-901 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 9th 2026 HINDI-901
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Rajasthan Board Class 9th HINDI-901 2026 solved Previous Year Question Papers
खण्ड — अ
निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
देश प्रेम क्या है? प्रेम ही तो है। इस प्रेम का आलम्बन क्या है? सारा देश अर्थात् मनुष्य, पशु, पक्षी, नाले, वन-पर्वत सहित सारी भूमि। यह प्रेम किस प्रकार का है? यह साहचर्य प्रेम है जिसके मध्य हम रहते हैं जिन्हें हम बराबर आँखों से देखते हैं, जिनकी बातें बराबर सुनते हैं-जिनका और हमारा हर घड़ी का साथ रहता है, जिनके सात्रिध्य का हमें आभास हो जाता है उनके प्रति लोभ या राग हो सकता है। देश-प्रेम यदि वास्तव में अन्तःकरण का कोई भाव है तो यही हो सकता है। देश प्रेम उच्च कोटि का माना गया है।
-
(i) आलम्बन शब्द में उपसर्ग का सही रूप है:
- (अ) आलम्ब+न
- (ब) आ + अलम्बन
- (स) आल + अम्बन
- (द) अ + अलम्बन
व्याख्या: 'आलम्बन' शब्द में 'आ' उपसर्ग और 'अलम्बन' मूल शब्द है।
-
(ii) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए:
- (अ) पशु-प्रेम
- (ब) देश-प्रेम
- (स) भक्ति-प्रेम
- (द) वन-प्रेम
व्याख्या: पूरा गद्यांश देश-प्रेम की व्याख्या करता है, अतः यही उचित शीर्षक है।
-
(iii) देश प्रेम वास्तव में किस भाव का माना जाता है?
- (अ) अन्तःकरण
- (ब) बाहरी भाव
- (स) लोभ
- (द) पशु-पक्षी
व्याख्या: गद्यांश में कहा गया है कि देश-प्रेम यदि वास्तव में अन्तःकरण का कोई भाव है तो यही हो सकता है।
-
(iv) साहचर्य से क्या उत्पन्न होता है?
- (अ) लोभ या राग
- (ब) अन्तःकरण
- (स) साहचर्य
- (द) प्रेम
व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, जिनके सात्रिध्य का आभास होता है, उनके प्रति लोभ या राग उत्पन्न होता है।
-
(v) देश-प्रेम का आलम्बन किसे माना गया है?
- (अ) मनुष्य, पशु, पक्षी, वन, पर्वत
- (ब) मनुष्य
- (स) पशु
- (द) पक्षी
व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट है कि देश-प्रेम का आलम्बन सारा देश अर्थात् मनुष्य, पशु, पक्षी, नाले, वन-पर्वत सहित सारी भूमि है।
-
(vi) जिसके मध्य हम रहते हैं, कैसा प्रेम है?
- (अ) साहचर्य प्रेम
- (ब) लोभ प्रेम
- (स) अन्तःकरण
- (द) राग
व्याख्या: गद्यांश में कहा गया है कि यह साहचर्य प्रेम है जिसके मध्य हम रहते हैं।
-
(vii) प्रस्तुत गद्यांश के अनुसार देश प्रेम किस प्रकार का माना गया है?
- (अ) उच्च कोटि
- (ब) निम्न कोटि
- (स) सामान्य
- (द) निम्न व सामान्य
व्याख्या: गद्यांश के अंत में स्पष्ट कहा गया है कि देश प्रेम उच्च कोटि का माना गया है।
-
(viii) सारा देश किसे माना गया है?
- (अ) मनुष्य, पशु, पक्षी, नाले, वन-पर्वत सहित सारी भूमि
- (ब) देश जैसे - भारत, नेपाल इत्यादि
- (स) जहाँ मनुष्य रहते हों
- (द) देश की खाली भूमि
व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, सारा देश अर्थात् मनुष्य, पशु, पक्षी, नाले, वन-पर्वत सहित सारी भूमि को देश माना गया है।
निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
दिवसावसान का समय,
मेघमय आसमान से उतर रही है
वह संध्या-सुन्दरी परी सी
धीरे-धीरे टाउन ।
प्रश्न 3
किन्तु जरा गम्भीर नहीं है उनमें हास-विलास |
हँसता है तो केवल तारा एक
गुंथा हुआ उन घुँघराले काले-काले बालों से
हृदय राज्य की रानी का वह करता है अभिषेक।
-
(क) प्रस्तुत पद्यांश में किस समय का वर्णन है?
- (अ) प्रातः
- (ब) दोपहर
- (स) संध्या
- (द) रात्रि
व्याख्या: पद्यांश में 'तारा' और 'हृदय राज्य की रानी' का उल्लेख है, जो रात्रि के समय का संकेत देता है।
-
(ख) संध्या-सुन्दरी किसके समान प्रतीत हो रही थी?
- (अ) गुड़िया-सी
- (ब) कामिनी-सी
- (स) चंचलता
- (द) आसमान
व्याख्या: पद्यांश में संध्या-सुन्दरी को कामिनी (स्त्री) के समान बताया गया है।
-
(ग) उपर्युक्त पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए -
- (अ) दिवसावसान
- (ब) संध्या-सुन्दरी
- (स) चंचलता
- (द) आसमान
व्याख्या: पद्यांश का मुख्य विषय संध्या-सुन्दरी का वर्णन है, अतः यह शीर्षक सबसे उपयुक्त है।
-
(घ) “चंचलता' शब्द में प्रत्यय है -
- (अ) चंचल
- (ब) लता
- (स) ता
- (द) च
व्याख्या: 'चंचलता' शब्द में मूल शब्द 'चंचल' है और प्रत्यय 'ता' जुड़ा है।
-
(ङ) 'हँसता है केवल तारा एक' तारा कहाँ हँसता है?
- (अ) आकाश में
- (ब) अधर पर
- (स) तिमिरांचल में
- (द) घुँघराले काले-काले बालों से गुंथा हुआ
व्याख्या: पद्यांश के अनुसार तारा घुँघराले काले-काले बालों में गुंथा हुआ है और वहीं हँसता है।
-
(च) संध्या-सुन्दरी कहाँ से उतर रही है?
- (अ) तिमिरांचल से
- (ब) धरती से
- (स) मेघमय आकाश से
- (द) पानी से
व्याख्या: संध्या-सुन्दरी मेघमय आकाश से उतरती है, जो संध्या के समय का वर्णन है।
-
(छ) दिवसावसान का अर्थ है -
- (अ) सूर्यास्त का समय
- (ब) सूर्योदय का समय
- (स) रात्रि का समय
- (द) दोपहर का समय
व्याख्या: 'दिवसावसान' का अर्थ दिन का अंत या सूर्यास्त का समय होता है।
खण्ड 4
दिये गये बिन्दुओं के आधार पर किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए -
-
पर्यावरण प्रदूषण : कारण और निवारण
- प्रस्तावना
- पर्यावरण प्रदूषण की समस्या
- पर्यावरण प्रदूषण के दुष्प्रभाव
- पर्यावरण प्रदूषण निवारण के उपाय
- उपसंहार
-
विद्यार्थी जीवन में नैतिक शिक्षा की उपयोगिता
- प्रस्तावना
- नैतिक शिक्षा का स्वरूप
- नैतिक शिक्षा की उपयोगिता
- नैतिक शिक्षा की आवश्यकता
- उपसंहार
-
मोबाइल एक वरदान या अभिशाप
- प्रस्तावना
- मोबाइल के उपयोग
- मोबाइल का शिक्षा में महत्त्व
- मोबाइल के दुष्प्रभाव
- उपसंहार
-
विद्यार्थी जीवन : भावी जीवन का आधार
- प्रस्तावना
- विद्यार्थी जीवन के गुण
- भावी जीवन की तैयारी
- भावी जीवन में विद्यार्थी की भूमिका
- उपसंहार
आपके मित्र ने बोर्ड परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया है उसे बधाई देते हुए एक संवाद लिखिए।
संवाद:
राम: नमस्ते श्याम! बहुत-बहुत बधाई हो, तुमने बोर्ड परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई।
श्याम: धन्यवाद राम! तुम्हारी शुभकामनाओं का बहुत महत्व है। यह सब मेहनत और गुरुजनों के आशीर्वाद का फल है।
राम: तुमने तो सचमुच हम सबका नाम रोशन कर दिया। तुम्हारी मेहनत और लगन देखते ही बनती है।
श्याम: तुम्हारा सहयोग और प्रोत्साहन भी इस सफलता में शामिल है। आगे भी इसी तरह मार्गदर्शन देते रहना।
राम: निश्चित रूप से! तुम्हारे उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।
अथवा
स्वयं को अभिषेक मानते हुए अपने मित्र को जन्म-दिवस के उपलक्ष्य में बधाई-पत्र लिखिए।
बधाई-पत्र:
दिनांक: 15 जनवरी 2026
प्रिय मित्र रोहित,
स्नेहपूर्ण नमस्कार।
आज तुम्हारा जन्मदिन है, इस शुभ अवसर पर मैं तुम्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ। ईश्वर से प्रार्थना है कि तुम्हारा जीवन सुख, समृद्धि और सफलता से भरा रहे। तुम हमेशा खुश रहो और अपने सभी सपनों को पूरा करो।
इस विशेष दिन पर तुम्हारे साथ न हो पाने का दुख है, परंतु मेरी शुभकामनाएँ हमेशा तुम्हारे साथ हैं। जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएँ!
तुम्हारा मित्र,
अभिषेक
आपके विद्यालय में आयोजित “वार्षिकोत्सव” पर एक प्रतिवेदन लिखो।
प्रतिवेदन:
विद्यालय का नाम: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जयपुर
दिनांक: 20 दिसंबर 2025
विषय: वार्षिकोत्सव का प्रतिवेदन
हमारे विद्यालय में 20 दिसंबर 2025 को वार्षिकोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री रमेश शर्मा जी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद विद्यालय के प्रधानाचार्य ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। छात्रों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिसमें नृत्य, गीत, नाटिका और कविता पाठ शामिल थे। मुख्य अतिथि ने मेधावी छात्रों को पुरस्कार वितरित किए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। यह आयोजन अत्यंत सफल रहा।
खण्ड - स
रिक्त स्थान की पूर्ति करो -
- नभ, गगन, अम्बर आकाश के पर्यायवाची हैं।
- “यश” शब्द का विलोम शब्द अपयश होता है।
- “उल्टी गंगा बहाना' मुहावरे का अर्थ असंभव कार्य करना होता है।
- 'लड़की खेल रही है' वाक्य में क्रिया है।
- जिस शब्द से पुरुष या महिला होने का बोध होता है, उसे लिंगवाचक शब्द कहते हैं।